Monday, June 30, 2008

कुसुम : मेरी बेटी

आजकल सभी बङी खबरें मेरे लिए निरर्थक होने लगी हैं, क्योंकि मैं जिस बङी खबर का इंतजार करता रहता हूं, वह यह है कि आज मेरी बेटी ने अपनी मां को कितना हंसाया या कितना तंग किया. मेरी बेटी कुसुम अभी मेरे साथ नहीं है, वह इन दिनों अपने ननिहाल में है. उसका जन्म भी 29 मई को वहीं हुआ. हर रोज मैं दिन में चार बार फोन करके पूछता हूं कि वह अभी क्या कर रही है और उस वक्त उसने क्या किया जब मैं उसके साथ नहीं था.मुझे बहुत अफसोस है कि उसकी तस्वीर मैं आप सबों को दिखा नहीं सकता. हालांकि उसकी तस्वीर मेरे मोबाइल में है पर उसे कंप्यूटर पर डाउनलोड करने वाला डिवाइस मेरे पास नहीं है. वह बिल्कुल अपनी मां पर गई है. इन दिनों उसने कुछ ज्यादा ही रोना सीख लिया है, जिससे उसकी मां परेशान रहती है. वैसे वह कभी कभी मुस्कुराती भी है. मगर अब तक उसने हमें पहचाना नहीं है, बेबी सेंटर डाट काम पर बताते हैं कि अब कभी भी वह हमें पहचान कर मुस्कुरा सकती है. हालांकि यह तोहफा मुझे नहीं मेरी बीवी को मिलेगा, फिर भी बङी बेताबी से मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूं. मुझे इस बात का भी अफसोस है कि मुझे उसकी पहली पहचान देख पाने के लिए छुट्टी नहीं मिल पाएगी.हमारा सिस्टम ऐसी चीजों के लिए छुट्टी नहीं देता. जबकि ये बातें कितनी महत्वपूर्ण हैं, यह सिर्फ महसूस किया जा सकता है.

2 comments:

Anonymous said...

बधाई हो पुष्या। चलो एक और मकसद मिला... एक और काम... बिटिया के पास कुछ दिन रह आओ या भाभी को ही बुला लो... और अभी तो अपना सब नॉर्मल चल रहा है।

Anonymous said...

पशुपति बोल रहा हूं... नाम लिखना भूल गया था...