Friday, August 03, 2012

प्रधानमंत्री जी आप तो अन्तरयामी ठहरे


जयंत ने इस बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम एक चिट्ठी लिख भेजी है... मौन मोहन सिंह इसे पढ़ पायें इसी कोशिश में यह चिट्ठी यहाँ टांग रहा हूँ..
प्रधानमंत्री साहेब,
प्रणाम
देश का समाचार सब ठीक है, खासकर मेरे राज्य का, वो आपकी दुआ से एकदम चकाचक है. सब लोग कमा खा रहे हैं, योजना आयोग जिन्दाबाद के नारे के साथ. ठीक ही किया आपके योजना विभाग ने जो एकदम टेटुआ टाईट करके भारतीयों के जीने का दाम तय किया. प्रधानमंत्री जी आप तो अन्तरयामी ठहरे, आपको पता है आदमी को ज्यादा रूपया मिलेगा तो आदमी का बुद्घि दारू, जुआ, नशा में लग कर भन्ना जाएगा. ऐसे में क्या खाक देश का विकास होगा. ऐ हुजूर एक बात सुने थे, सोचे चिट्ठी में लिखकर गंगा नहा लेगे, परन्तु हमारा भ्रम है. अब गंगा पर काफी ड्रामा हो रहा है. कुछ इलाज किजिए इ पंडितवन के, साले घिघियाके मर जाएगे. हम बुरबक क्या से क्या बोल गये. आप पंडित पर हाथ कैसे डालेगे, राहुल गांधी भी बाभन है. आप त बाभन समाज के एहसानमंद है.
बेकार का बात करना हमारा आदत नहीं, हमारा समाचार आप तक पहुंच जाए बहुत है. हमारा दोनों बिटिया स्कूल जाती है, एक लईका(लड़का) है उसे भी भेजता हूं. समस्या है मेरे बेटे के दिमाग में पढ़ाई का बात घुसता नहीं. हम केतना बार बोले पढ़ ध्यान लगाके, नहीं पढ़ेगा तो कही का नहीं रहोगे. ए सर, बचवा कहता है अब दिमाग का नहीं चुप रहने का जेनरेशन है. हम बोले, तनी खुल के बताओ, तो़ क़हता है हमारे प्रधानमंत्री दिमाग लगाते हैं क्या?
ऐसे प्रश्नचिह्न वाला बात बोला के हम ही प्रश्नवाचक बन गये. हम खूब डांटे, बाप रे बाप छोटी मुंह बड़ी बात. प्रधानमंत्री को दिमाग नहीं ऐसा कैसे हो सकता है. कही ऐसा हुआ है क्या? वह भी आप जैसे अर्थशास्त्री के लिए जो पाई-पाई जोड़ने में माहिर हो. रूपया पैसा से याद आया आपको उपरी आमदनी होता है कि नहीं. महंगाई के हिसाब से होना चाहिए. अगर नहीं होता तो ठीक बात नहीं है, इ 6-7 साल में आपके देख-भाल में लोगों ने काफी रूपया कमाया, वो भी कोई बाहरी नहीं मंत्रीमंडल के ए राजा, कलमाडी उसमें कोई लेडिज भी है. उपरी इनकम हक है, ध्यान दिजिएगा अपने कमीशन का. इसमें अगर आपको कोई बुराई लगे ऐसी कोई बात नहीं सब किसी को घर चलाना है, आपको महिना भर का राशन लाना होता होगा कि नहीं, बच्चा का स्कूल फीस, बिजली बिल, गेस्ट का सत्कार आखिर सब होगा रूपया से. गाँठ बाँध के रख लिजिए, जितना भी आपके मंत्री लोग कमाए उसपर आपका कमीशन फिक्स होना चाहिए. कोर्ट-कचहरी से डरना नहीं, आखिर जज, सीबीआई आपके अन्डर में है फिर डरना क्या.
आप कितना फेमस हो गये है इसका अनुमान आपकी धर्मपत्नी को भी नहीं होगा. मध्यवर्गीय समाज में वर पक्ष वधु पक्ष से कन्या के संबंध में सवाल करता है कि लड़की मनमोहन सिंह जैसा चुप रहती है या ममता की तरह चपड़-चपड़ जवाव सवाल करती है. हैरत तो तब होती की लड़की वाला विन्रमता से कहता भाईसाहब न्यू जेनरेशन है मतलब की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह है.
प्रधानमंत्री जी रमुआ अपने गांव काम मांगने गया तो मुखिया उसको मनरेगा में काम देने के लिए रिश्वत मांगता है, शिकायत करने के लिए बोलने पर कहता है कि राहुल जी, सोनिया जी, मनमोहन जी, गृह मंत्री जी और बाकी सब जी मिलकर कितना रूपया पैसा खर्चा करके राष्ट्रपति बनाये. वह लोग शिकायत करने नहीं गये. आप बता दिजिए की मुखियवा ठीक कहता है, आपलोगों को बहुते रूपया-पैसा खर्चा हुआ है क्या ?
हमारे बाबूजी गांव के चौकीदार थे, चाचा आदेशपाल... आपसे क्या छुपाना है हमको एक जनलोकपाल का नौकरी दे दिजिए. टीवी पर देखे जब अन्ना बाबा बूढ़ा होने पर नौकरी के लिए हल्ला किये हैं तो हम जवान हैं. विश्वाश नहीं हो तो नाप-जोख लिजिए. किरण जी दुबारा नौकरी करेगी और हम लोग बेकार घूमेंगे. इ कहां का इंसाफ होगा. गांव के चट्टी (बाजार) पर गये जनलोकपाल का फार्म लाने सोचा भर दे कही टाईम खत्म हो गया फिर आपका पैरवी भी काम नहीं आएगा. फार्म मांगे दुकानदार से, दुकानदार बोला की जनलोकपाल नौकरी नहीं बिल है, इंसाफ का. अरे भाई बिजली बिल, राशन बिल तो सुने थे. जनलोकपाल बिल जरूर महंगाई बढ़ाने वाला मशीन है क्या भाई. दुकानदार ने फिर बताया कि अन्ना बाबा इसी चक्कर से प्रधानमंत्री जी परेशान हैं. हमको तो एक ही बात पता कि ऐसे देवता मानुष पंतप्रधान जो किसी के बारे में कुछ बोलता नहीं उसको परेशान करना तोबा-तोबा. ए मालिक आप इ अन्नवा को चुपे-चुपे इलाज कर दिजिए, ससुरा का घिध्घी बन्द हो जाएगा. सुना है अन्न-जल त्याग दिया है, आपके इलाज से अन्न तो क्या सूखा लकड़ी भी चबाने लगेगा.
सब चिन्ता छोड़ अपने सेहत पर ध्यान दिजिए. पूरे देश की उम्मीद आपसे है. सुबह-सुबह योग किजिए अनुलोम-विलाम, प्राणायाम से तबीयत ठीक रहेगा. हमलोग भोरे-भोरे मंटेसरी स्कूल के फिल्ड में जाते है। वही पर अनुपवा बता रहा था कि बाबा रामदेव काला धन लाने के फिराक में प्रधानमंत्री पर जोर लगाए है. इस मुर्ख को कौन समझाए कि जो पैसा जल गया उसके लिए प्रधानमंत्री को कहना या तंग करता अच्छी बात है? अनुपवा फिर बोला की काला धन से देश में खुशहाली आएगा. अरे अनुपवा.. हम तुमसे पूछते हैं काला धन कोई खाद-बीज है जिससे फसल अच्छा होगा. मान ले कि खाद-बीज है तो इससे किसान को फायदा होगा, प्रधानमंत्री को बीच में घसीटना कहां का समझदारी है. रामदेव बाबा को योग से रूपया का रोग लग गया. कुछ दिन पहले इसी रूपया रोग के कारण रामदेव बाबा को गेरूआ वस्त्र उतरवाके लेडिज का कपड़ा प्रधानमंत्री का आदमी पहनाया था. अब अगर आप जैसे सन्त महात्मा प्रधानमंत्री को किसी ने तंग किया तो नर्क में भी उसे जगह नहीं मिलेगा.
बाकी क्या लिखू, पत्र के मजमून को पढ़कर सोच विचार के कभी-कभी बोल दिजिएगा. आपके चुप्प रहने से मन घबरा जाता है. हम कसम खाते है अगर मुझे नौकरी मिली तो आप जैसा बन जाऊगा, खाली सुनूँगा. किसी एक लेडिज ( सोनिया माई) की बात पर ध्यान दूंगा. राहुल बबुआ जैसे मालिक के हां में हां मिलाकर बोलने का प्रयास करूंगा. अपने मालिक के परिवार के बारे में सोचना मेरा परम धर्म होगा. ईश्वर आपको पक्ष-विपक्ष की विपदा से बचाए. मुलायमा, ललुआ, इ सब आदमी ठीक नहीं है. शरदवा जैसा काला है उसका दिल भी उतना ही काला है. हमको विश्वास है कि आप पर माई जी और बबुआ का आशीर्वाद और दुलार जब तक रहेगा कोई माई का लाल आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. अन्त में हमार बाबुजी और माई जी का आर्षिवाद आपको मिले घर के छोटका बच्चन के प्रणाम स्वीकार किजिए. कोसी मईया के शाप से बचूंगा तो अगले पत्र में अपने बचने को कारण लिखकर भेजूंगा.
हमारा प्रणाम स्वीकार करें
एक शुभचिंतक... जिम्मेदार ग्रामीण

1 comment:

रंजीत/ Ranjit said...

Kamaal kee chithee hai...khat me kitab