Thursday, August 16, 2012

ससुराल गेंदा फूल और तार बिजली


तार बिजली गाने की काफी चर्चा सुनी. आभासी दुनिया में शोर बरपा हुआ है.. शारदा सिन्हा का नाम बरबस खींचता है. डाउनलोड करना ही पड़ा. घर में जब पहली बार बजा..तार बिजली के जैसे हमारे पिया..हाये सासू बता तूने ये क्या किया तो उपमा पूछ बैठी. सोहर है क्या? उपमा धनबाद में पली बढ़ी है.. मगर उसे गैंग्स ऑफ वासेपुर के बारे में ज्यादा नहीं मालूम.. हां, सोहर के बारे में थोड़ा बहुत मालूम है. गाना जब खत्म होने को आया तो फिर से उसकी आवाज आयी.. शारदा सिंहा गा रही है. हां.. इतनी देर बाद समझ आया? मैंने पूछा तो उसने जवाब दिया- अभी भी उसका टोन नहीं लग रहा है..
दिन में तीन या चार बार गाना बजा. बेटी एक-आध बार झूम के नाची भी. उपमा ने कहा, ससुराल गेंदा फूल जैसा नहीं है. तिया भी वैसे नहीं नाची, जैसे ससुराल गेंदा फूल सुनकर आज भी उछल जाती है. उपमा और तिया मेरे कान और आंख हैं. इनके रहने पर मैं बहुत जल्दी किसी से प्रभावित नहीं होता. डर्टी पिक्चर देखकर उपमा ने कहा था, फैशन का कॉपी है.. इससे पहले हम लोग सपरिवार गैंग्स ऑफ वासेपुर पार्ट 1 के गाने भी सुन चुके हैं. वुमनिया से लेकर टैटै-टूटू तक. तिया को टैटै-टूटू और हंटर काफी पसंद आया. उपमा मुंह बनाये रही.
मैं जरूर शुरुआत में गैंग्स ऑफ वासेपुर के संगीत से प्रभावित होता रहा. मुझे लगता था कि इस तमाशे में अगर कोई चीज बहुत अच्छी है तो वह इसका संगीत है. स्नेहा खानवलकर ने पहली दफा बिहार के विभिन्न इलाकों के लोक संगीत को इतने बड़े पैमाने पर बालीवुड की दुनिया में लांच किया है. फिर एक दिन रोटी, कपड़ा और सिनेमा नामक ब्लॉग पर स्नेहा के बारे में बड़ी अच्छी रपट पढ़ी.
कह के लूंगा. पता नहीं.. इस तीसरे दरजे के लेन-देन के बिना अनुराग क्यों नहीं काम चला पाये. अपनी काबिलियत पर भरोसा नहीं था या दर्शकों की समझ-बूझ पर. यह बेवजह का गाना था. इक बगल में चांद होगा.. बड़ा अच्छा लिखा और गाया गया. हंटर के बारे में जैसा पता चला कि मारिशस से मिला था. वुमनिया और मुहझौंसा.. मुहझौंसा तो ठीक है.मगर वुमनिया कहां से आया.. आज तक यह राज मेरे लिए राज ही है. भूस के ढेर में राई जहां बिदेसिया की याद दिलाते हैं वहीं एक गाना हमारे इलाके में होने वाले भगैत जैसा है. बोल याद नहीं आ रहे. जियो हो बिहार के लाला.. भी अनुराग एंड कंपनी की आत्मविश्वास की कमी को ही रेखांकित करता है.
इन गानों को सुनते-सुनते एक महीना गुजरने वाला है. अब इन्हें बजाया नहीं जाता. बजाता हूं तो उपमा मुंह बनाने लगती है और तिया कहती है..दूसला..दूसला. तीसरी कसम का बरसों पुराना एक गाना है..आज भी नया ही है..किसी भदेस पार्टी में बजता है तो हमारे जैसे जवानी को विदा कर रहे देहाती भी उछलने लगते हैं.. वही..पिंजरे वाली मुनिया.. यह भी बिहार का ही लोक गीत है. हमारे जिले के फारबिसगंज मेले में बजता होगा. रेणुजी ने वहां से उड़ाया और शंकर-जयकिशन(शायद) ने पता नहीं कहां से उड़ाया. गैंग्स ऑप वासेपुर के गीतों की चर्चा करते हुए पिंजरे वाली मुनिया की याद आ जाती है. आखिर क्या वजह है कि गैंग्स ऑफ वासेपुर के दो दर्जन से अधिक गानों में से एक भी न ससुराल गेंदा फूल जैसा बना और न ही पिंजरे वाली मुनिया के आसपास पहुंच पाया.
इसकी वजह भी मुझे कहीं न कहीं अनुराग का नेतृत्व ही लगता है. वे इतनी अच्छी फिल्मोग्राफी करने के बावजूद कह के लूंगा के भरोसे फिल्म का भविष्य तलाशते रहे और उसी कहके लूंगा ने उनकी फिल्म की लुटिया डुबो दी(शायद). अच्छी खासी रिसर्च के बावजूद अगर संगीत वैसा(अपेक्षित) जादू नहीं कर पा रहा है(किसी लोकल मेस की दाल जैसा लग रहा है, जिसे गाढ़ा करने के लिए होटल का मालिक उसमें मांड मिला देता है, या तीन बार इस्तेमाल किये गये तेल में छने पकौड़े या चार बार यूज की गयी चाय पत्ती की बनी चाय जैसा) तो इसकी वजह भी कह के लूंगा ही है. वुमनिया से लेकर तार बिजली तक कई गानों में अच्छी शायरी का कौशल डर्टी हो जाने की बहक में खत्म हो रहा है. स्नेहा ने बिहार के लोक संगीत का चेहरा तो पहचान लिया है मगर उसके चेहरे पर वह लाली नहीं है जो पिया को पा जाने या पिया को गंवा देने पर उभरती है. तार बिजली दिल के तार को नहीं छूती क्योंकि संगीत के शोर में शारदा सिंहा की खनक खो जाती है. तमाम गानों के मुखड़े उम्मीद जगाते हैं मगर अंतरा आते-आते जादू टूटने लगता है.

2 comments:

Anonymous said...

खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों में कोमल निशाद और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं,
पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में पंचम
का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता है.

..

हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
.. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा
जंगल में चिड़ियों कि चहचाहट से मिलती है.
..
Also visit my blog post ... हिंदी

nayan said...

jiyo Bihar