आप देवदूत हैं लच्छी मामा - मुरली कार्तिक


कुछ लोग वीवीआईपी नहीं होते वे वीवीएस होते हैं. वीवीएस लक्ष्मण वीवीआईपी नहीं थे इसलिए उन्हें शुरूआती दिनों में लगातार ओपनिंग करना पड़ा, जबकि वे स्वाभाविक रूप से मिडल आर्डर के बल्लेबाज थे. उन्हें लगातार परफोर्म करना पड़ा, क्योंकि दो मैच की असफलता उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा देती. इसके बावजूद अगर टीम एक समय टेस्ट में नंबर वन हुयी तो इसका बड़ा श्रेय उनको जाता है. खास कर सेकेण्ड इनिंग की उनकी बल्लेबाजी को. उनके रिटायर होने पर एक साथी खिलाडी मुरली कार्तिक ने बड़े भावुक अंदाज में उन्हें याद किया है. क्रिकेट की दुनिया को समझने के लिए यह आलेख बड़ा महत्वपूर्ण है. मूल सामग्री क्रिकइन्फो.कॉम से साभार.
प्रिय लच्छी मामा, हमने जो वक़्त साझा किया है उसके बारे में कहाँ से लिखना शुरू करूँ? एक घटना से शुरू करता हूँ. जैसा कि आप जानते हैं मैंने आपके लिए कई, कई बार नेट पर बोलिंग की है. 2005 में श्रीलंका के खिलाफ अहमदाबाद टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर आपने मेरी एक गेंद पर अस्वाभाविक ड्राइव किया था. इससे पहले कि मैं अपनी भावना व्यक्त कर पता आपने खुद ही माफ़ी मांग ली. प्यारी सी दकनी में जिसे हम हैदराबादी हिन्दी कहते हैं, आपने कहा:. "जान बूझ के नहीं मारा. होना बोल के मारा. प्रक्टिस करने के लिये होना बोल के मारा.
इतनी प्यारी जुबान. आपको भला कोई कैसे पसंद नहीं करेगा?
अगर आप बुरा न माने तो मैं कहना चाहूँगा कि मैं खुद को लकी समझता हूँ जो आपका करीबी दोस्त बन सका. इस डॉग इट डॉग वर्ल्ड में, आपके पास होने से हमेशा सुकून महसूस होता था. 2000 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जब मैंने अंतरराष्ट्रीय कैरियर की शुरुआत की, आपने हमेशा मेरे लिए समय निकला. मैंने पहली बार आपके खिलाफ चेन्नई में पचैयाप्पस के कॉलेज मैदान में एक अभ्यास मैच खेला था और अविश्वसनीय रूप से, उस दिन से आज तक, आप वैसे के वैसे ही हैं.
भारतीय क्रिकेट में आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त रहे हैं. मैंने खुद को गौरवान्वित महसूस किया जब 2004 में अपनी शादी के समारोह में आपने क्रिकेटर के रूप में अकेले मुझे ही आमंत्रित किया. अगर आपको याद हो, शादी में एक अनुष्ठान हुआ था जिसमे पुजारी दो लकड़ी की कठपुतलियों एक लड़का और एक लड़की को पकडे हुए थे, वे परिवार के प्रतिरूप थे. शादी के बाद परंपरागत रूप से उन कठपुतलियों को दूल्हे की बहन को दिया जाता है. मगर आपने उसे मेरी पत्नी श्वेता को दे दिया और जब जब आपके बच्चे पैदा हुए तो उन्हें लेकर आप हमारे घर गुड़गांव आये थे.
जब मैं सोचता हूँ कि हम कैसे इतने करीबी दोस्तों बन गए, तो एक घटना याद आती है. यह मुझे वापस 2003 में ले जाती है और मुझे हंसी आ जाती है. मुझे यकीन है कि आपको पता है कि मैं क्या बात कर रहा हूँ. 2003 के विश्व कप से पहले, मैं न्यूजीलैंड के दौरे के लिए चुना गया था, इससे पहले मैं वेस्टइंडीज के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में बेहतर प्रदर्शन कर चुका था. मगर मुझे न्यूजीलैंड के साथ वन डे श्रंखला में शामिल नहीं किया गया. यह मेरे लिए बड़े हैरत की बात थी.
उस वक़्त आप ही ने मुझे शान्ति दी थी, कहा था- इस तरह की बातें होती हैं. वैसे भी न्यूजीलैंड में एक स्पिनर के लिए कुछ नहीं रखा. टीम में अनिल कुंबले और हरभजन सिंह जैसे सीनियर खिलाडी थे. मैं एकदिवसीय श्रृंखला के लिए इसलिए उम्मीद कर रहा था, क्योंकि विश्व कप टीम के लिए जल्द ही टीम की घोषणा होने वाली थी.
लेकिन जब विश्व कप टीम की घोषणा हुयी तो आश्चर्यजनक तरीके से आपका नाम उसमे नहीं था. विडंबना यह हुयी कि हम दोनों ने खुद को एक दूसरे के खिलाफ हैदराबाद में रणजी ट्राफी मैच खेलता पाया और एक महीने बाद हम दोनों कैरेबियन दौरे के लिए साथ साथ इंडिया ए टीम का हिस्सा बन कर रवाना हुए. जब भी हम न्यूजीलैंड के बारे में सोचते हैं, हम हँस पड़ते हैं. यह कहना बेकार है, कि हममें से कोई मानसिक रूप से ए टीम का हिस्सा बनना नहीं चाह रहा था, आप तो विशेष रूप से. यह देखते हुए कि आप पहले दो मैचों में लगातार चार बार डक पर आउट हुए थे. आपने उस वक़्त कहा था: "कार्तिक, मैं अब से तुम्हे सलाह नहीं दूंगा क्योंकि मैं जो तुमसे कहता हूँ वह मुझ पर ही लागू हो जाता है." आपके जैसा दोस्त मिलना मेरे लिए क्रिकेट के किसी अवार्ड से बहुत बड़ा इनाम है.
मैं भाग्यशाली हूँ कि आपकी कप्तानी में खेलने का मौका मिला है. आपके समेत मुझे तीन बड़े अच्छे कप्तानो की कप्तानी में खेलने का मौका मिला. अज्जू भाई (मोहम्मद अजहरुद्दीन) के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और वीबी चंद्रशेखर के साथ इंडियन सीमेंट्स में. आप इनमे सबसे बेहतर थे. आपकी शैली अजहरुद्दीन स्कूल से मिलती जुलती है. आप मानते हैं की गेंदबाज एक हद तक अपना कप्तान खुद होता है.
मेरे लिए, यह शानदार था. क्योंकि मुझे मालूम था कि मैं क्या करने की कोशिश कर रहा हूँ. इसपर अगर मेरे कप्तान का मुझे समर्थन मिल गया तो इससे अधिक मैं और क्या उम्मीद कर सकता हूँ? आपने कोई बात मुझ पर थोपने की कोशिश की कभी नहीं की. आप सकारात्मक थे, पर अटैकिंग फील्ड लगते थे और मैं एक चैंपियन की तरह गेंदबाजी करता.
मुझे 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुंबई टेस्ट आज भी याद है जब आपने उस खतरनाक पिच पर 69 रनों(दोनों टीम में किसी भी बल्लेबाज द्वारा उच्चतम) की यादगार पारी खेली थी. जबकि मेन ऑफ़ द मैच का पुरस्कार सात विकेट झटकने के लिए मुझे दिया गया. पुरस्कार के तौर पर मिले बड़े से प्लास्टिक चेक पर सबसे पहले आप ही ने लिखा था, "एबसोल्युट मैचविनर, हमेशा उम्मीद करता हूँ कि ऐसी सफलता बार-बार हासिल करो."
लेकिन मामा हम जानते हैं कि सच्चे मैचविनर आप थे. कई अवसरों पर, विशेष रूप से 2003 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट में. 45 डिग्री की गर्मी में आप और राहुल द्रविड़ ने आश्चर्यजनक बल्लेबाजी कर 303 रन की भागीदारी निभायी, खास तौर पर इन हालातों में जब एक समय भारत 4 विकेट पर 85 रनों के स्कोर पर था. लोग आपके 281 रन वाली पारी के बारे में बात करते हैं, लेकिन मुझे 148 रन की पारी में ज्यादा मज़ा आया. आपकी इस पारी के कारण हमने ऑस्ट्रेलिया पर जीत दर्ज की और भारत नंबर 1 टेस्ट टीम बनने की रह पर निकल पड़ा.
मुझे आश्चर्य होता है कि आपने कैसे किसी के खिलाफ कभी कोई गलत बात नहीं कही यहां तक ​​कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी जिन्होंने आपको नुकसान पहुंचाया है. बहुत लोग चुप नहीं रह पाते.
याद है जब आपने आईपीएल के उद्घाटन सत्र में डेक्कन चार्जर्स के आइकन का दर्जा छोड़ने का फैसला किया था? मैं जानता था कि आप के लिए पैसे का कोई आकर्षण नहीं है. आपने ऐसा सिर्फ इसलिए किया था क्योंकि आप हैदराबाद को एक मजबूत टीम बनाने चाहते थे. आप हमेशा अपनी टीम के बेहतर प्रदर्शन के लिए इमानदारी से प्रयासरत रहते थे. जब मैंने भारतीय घरेलू टीम के एक वरिष्ठ खिलाडी का नाम लिया था जिसे पहली आईपीएल के दौरान अनदेखा किया गया था, तो आपने उसे टीम में शामिल कर लिया.
हमने शनिवार को एक बार फिर आपकी निस्वार्थता को देखा, जब आपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा. जब आप भारतीय टीम में आये थे तो शुरूआती कुछ वर्षों में आपको विदेशों में खेलन पड़ा था. उस दौरान भारतीय टीम बाहर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही थी तो किसी न्यू कमर को पहले होम ग्राउंड पर खेलने का मौका देना चाहिए था. मुझे मालूम है आपने सोचा होगा कि अगर खेलते रहे तो यह अच्छी बात नहीं होगी. कितने लोग भारतीय क्रिकेट के बारे में सोचते हैं, कितने लोग ऐसा सोचते हैं कि नए खिलाडी को ग्रूम करने का मौका मिलना चाहिए. हालाँकि आप बड़ी आसानी से अपने 134 टेस्ट कैप को आगे बढ़ा सकते थे.
मैंने हमेशा सही बात कहने में विश्वास किया है बनिस्पत अच्छी बात कहने के. आप मृदुभाषी हैं और बहुत आदर्शवादी भी. आपके इसी रवैये ने मुझे वैसा बनाया जैसा मैं हूँ. आप हमेशा मानते रहे कि कुछ चीजों को बदला नहीं जा सकता. आपकी इसी बात ने मुझे उत्साह बनाये रखने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि मैं कई-कई बार टीम से बाहर रहा हूँ. इसके बावजूद मैं असंतुष्ट नहीं हूँ.
मैं सचमच विश्वास नहीं कर सकता कि अब आप अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलेंगे. जब मैंने आपके रिटायर्मेंट के बारे में सुना, मैं आंसुओं में डूब गया. मेरे जीवन पर हमेशा आपका शांत प्रभाव रहेगा. यदि सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, तो आप वीवीएस किसी देवदूत सरीखे हैं.
सच में आपका, कार्तिक

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