Thursday, August 30, 2012

अफसोस ! कोयला खदानों में विजन नहीं मिलता


भ्रष्ट होना उतना बुरा नहीं है जितना विजन विहीन होना. कई बार हमारे शासक की सोच चुनाव खर्च जुटाने और जनता को बेवकूफ बनाने तक ही सीमित हो जाती है. जनता के पैसों और देश के संसाधनों के बदले अपनी झोली और पार्टी की थैली भर लेने के चक्कर में ही कोल-गेट जैसे घोटाले हो जाते हैं. फिर पूरा शासन तंत्र थेथरई में जुट जाता है, क्योंकि उन्हें न सिर्फ अपनी इमानदारी साबित करनी होती है बल्कि अगले चुनाव के लिए वोट मांगने लायक इमेज भी बचा कर रखना पड़ता है. हालांकि इन कोशिशों में सरकार इस कदर दंभ में डूब जाती है कि वह दिन को रात और रात को दिन साबित करने में जुट जाती है. उनके पीछे ऐसे लोगों का हुजूम होता है जो दिन को रात कहने के बजाय अमावस की रात कहने तक में नहीं शर्माता. मगर नतीजा आखिरकार जनता को भुगतना पड़ता है, क्योंकि उसने व्यावहारिक लाचारी के कारण ऐसी सरकार को चुन लिया है जिसमें हर कमी से बढ़कर विजन की भारी कमी है.
जहां तक हम सबकी आम समझ है और खुद सरकार का भी दावा है कि कोल ब्लाक के इस हड़बड़-गड़बड़ आवंटन के पीछे ऊर्जा क्षेत्र की कहानी है. देश में ऊर्जा का भारी संकट है और सरकार इस संकट का व्यापार करना चाहती है. इससे पहले सरकार एक बार और परमाणु ऊर्जा की खातिर सरकार को संकट में डाल चुकी है. हालांकि उस संकट से उबरने का आत्म विश्वास ही सरकार के मौजूदा दंभ का कारण है कि वह विपक्ष और जनांदोलनों के साथ-साथ जनता को भी जूते के नीचे रखने से गुरेज नहीं करती. ऊर्जा के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अनुचित दोहन और आम लोगों की सुरक्षा को ताक पर रखना हर सरकार के लिए आम बात है और यह एक पुरानी सरकारी परंपरा है. जल- विद्युत और सिंचाई के नाम पर करोड़ों लोगों को विस्थापित करने और नदियों को डस्टबिन में बदल देने के बाद भी सरकारें यह मानने को तैयार नहीं हैं कि वह तरीका गलत है. मध्यप्रदेश के ओम्कारेश्वर में आज भी विस्थापन के शिकार लोग जल सत्याग्रह कर रहे हैं, मीडिया की नींद में खलल डाले बगैर. साथ ही यह भी एक महत्वपूर्ण सूचना है कि झारखंड में एक भी व्यक्ति को विस्थापित किये पिछले दो साल में बगैर 3 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो गयी है, यह सब सिर्फ मनरेगा के पैसे से तालाब और कुआं खुदवाकर मुमकिन हुआ है. इसके बावजूद अगर सरकार को पता चल जाये कि सुवर्णरेखा या अजय नदी पर कहीं बांध बनवाने से 20 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो जायेगा तो सरकार सबसे पहले उस योजना को लागू कराने में जुट जायेगी.
कोल ब्लाकों के इस आवंटन से सबसे बड़ा नुकसान होना अभी बांकी है. इन 245 कोल ब्लाकों में जब उत्पादन शुरू होगा तो बड़े पैमाने पर गरीब आदिवासियों का विस्थापन होगा. फिर उन खदानों से जो कोयला निकलेगा वह भट्टियों मे जाकर अपने साथ धरती को गर्म करेगा और आसमान में कार्बन फैलायेगा. वे ताप विद्युत संयंत्र जहां यह कोयला जलाया जायेगा अपने आसपास की नदियों में कचड़ा बहायेंगे और उस नदी का तो सत्यानाश होगा ही नजदीकी इलाकों के लोग कैंसर की चपेट में आकर असमय कालकलवित होंगे. इतनी कुरबानियों के बाद हमारे घर में रोशनी आयेगी. हमारे टीवी-फ्रिज-एसी-कंप्यूटर और मोबाइल अनादिकाल तक जीवित रह पायेंगे.
क्या यह विजन की कमी नहीं है? क्या यह ठीक वैसा ही नहीं है जैसा हमने पिछली शताब्दी में अपनी नदियों और उनके किनारे रहने वाले करोड़ों गरीबों के साथ किया और नयी सदी में पता चला कि यह सब कुओं और तालाबों से भी मुमकिन है. क्या हम आज भी इस बात से अवगत नहीं कि अगर हर छत पर सोलर प्लेट और हर शौचालय में बायोगैस प्लांट लगा हो तो इतने बड़े पैमाने पर योजनागत नरसंहार की जरूरत नहीं. धरती को कुछ साल और हरा-भरा रहने और हमें बिना आक्सीजन खरीदे जीवित रहने की इजाजत मिल सकती है.
हाल ही में हमारी इसी जनोन्मुखी सरकार ने बीपीएल परिवारों के लिए 75 हजार का इंदिरा आवास और साथ में 10 हजार के शौचालय के कॉम्बो पैक देने की घोषणा की है. 85 हजार के इस प्रोजेक्ट में अगर 15 हजार और जोड़ दिये जायें तो रूफ-टाप सोलर सिस्टम और बायोगैस प्लांट की सुविधा बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जायेगी. इस एक सुधार के कारण देश की लगभग एक तिहायी आबादी ऊर्जा के लिए सरकार, नदियों, कोल-ब्लाक या परमाणु की मोहताज नहीं रहेगी. सरकार भी घपलों, घोटालों, हंगामों और आम जनती की तबाही के पाप से बच जायेगी.
मगर हर हाल में विजन बड़ा फैक्टर है और इसका अभाव किसी और चीज से पूरा नहीं किया जा सकता. जब सरकार यह सोच ले कि जब तक हमारी पार्टी के सिर पर गांधी परिवार का हाथ है तब तक हम सोचने में ऊर्जा व्यय करने से मुक्त हैं तो फिर किसी चीज का कोई इलाज नहीं है. रोशनी के नाम पर घोटाले-घपले होंगे, फिर झूठ को सच और रात को दिन साबित करने की थेथरई होगी. गलत फैसलों के कारण जनता त्रहिमाम करती रहेगी और लाचार हालत में सरकार को और खुद अपने नसीब को कोसती रहेगी.

1 comment:

Goyal Energy said...

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