सोना तो मम्मी मेरीकॉम के लिए ही बना है


पांच अगस्त को जब मेरीकॉम दनादन पंच चलाते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को धूल चटा रही थी तो उसके जुड़वां बेटे रेचुंगवार और खुपनेवार अपना पांचवां जन्मदिन माना रहे थे. यह उनका पहला जन्मदिन था जब उनकी ममा उनके साथ नहीं थीं. बहुत संभव है कि मेरीकॉम उनके लिए और पूरे देश के लिए सोने का तमगा लेकर लंदन से वापस लौटे. मुक्केबाज मम्मी मेरीकॉम के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है. उसने अब तक 15 अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते हैं जिसमें 11 गोल्ड और 3 सिल्वर हैं. उसने 6 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लिया है और पांच बार सोना हासिल कर लौटी है. उसने तीन सोना शादी से पहले जीता है और दो बच्चों के पैदा होने के बाद. सीजेरियन करवा चुकी मेरीकॉम के मुक्के की ताकत घटने के बजाय बढ़ रही है. उसके माता-पिता से लेकर स्पोर्ट्स ऑथारिटी तक पिछले पांच साल से उसके रिटायर होने का इंतजार कर रहे हैं. मगर 29 साल की उम्र में जिस करिश्मे पर उसकी नजर है वह न सिर्फ उसकी बल्कि पूरे देश की ख्याति में चार चांद लगाने वाला है.
इस बार जब ओलिंपिक में भारतीय टोली पहुंची थी तो मेरीकॉम के नाम की कहीं चर्चा नहीं थी. मेडल के दावेदारों में सायना नेहवाल, अभिनव बिंद्रा, दीपिका और सुशील कुमार के चर्चे थे. अब इन तमाम चर्चो पर विराम लग गया है. कई वर्ल्ड चैंपियन खाली हाथ लौट आये हैं. मगर मेरीकॉम का सोना लगभग पक्का लग रहा है.
मणिपुर के एक छोटे से गांव में एक भूमिहीन परिवार में पैदा हुई मेरीकॉम कभी सोच भी नहीं सकती थी कि वह खेल-कूद के सिलसिले में पूरी दुनिया का चक्कर लगायेगी. बचपन में उसे ठीक से खाने के लिए नहीं मिलता था. मांस और मछली के लिए तरसती थी. एक बार स्कूल की स्पर्धा में भाग लेने के लिए इंफाल गयी थी, जेवलिन थ्रो में हिस्सा लिया था. वहां मणिपुर के चैंपियन बॉक्सर डिंको सिंह का नाम सुना तो बाक्सिंग को ही सपना बना बैठी. एक कोच से अपने दिल की ख्वाहिश बता दी. उसने एक साल कोचिंग दिया और अगले साल वह बाक्सिंग की नेशनल चैंपियन थी.
फिर तो चैंपियन बनने का सिलसिला ही चल पड़ा. जहां जाती सोना जीत कर ही लौटती. मगर पिता को उसका यह खेल पसंद नहीं था. कहते थे, सूरत बिगड़ जायेगी. मगर जब बिगड़ती सूरत के सहारे ही मेरीकॉम ने पिता के हाथ में सोने के दो तमगे धर दिये तो उनको भी चुप होना पड़ा.
कैरियर ठीक-ठाक चल रहा था, तभी शादी करने का इरादा कर लिया. लोगों ने कहा, अभी कैरियर पीक पर चल रहा है अभी तो घर बसाने की मत सोचो. मगर मेरीकॉम ने कहा, घर बसाने से ही कैरियर जमेगा. अभी अकेले यहां-वहां घूमने में परेशानी होती है. पति साथ रहेगा तो बेफिक्र होकर खेल सकेंगी.
फिर बच्चे हुए. जुड़वां.. वो भी सिजेरियन. घर वालों ने सोचा अब तो घर बैठेगी. मगर मेरीकॉम कहां घर बैठने वाली थी. अगले साल ही निकल पड़ी और वर्ल्ड टाइटल जीत लिया. अब ऐसी जिद्दी खिलाड़ी का क्या किया जा सकता है.
कहते हैं स्पोर्ट्स ऑथारिटी भी इस इंतजार में थी कि मेरीकॉम कब खेलना बंद करती है, मगर मेरीकॉम ने तो जैसे अभी सफर शुरू ही किया है. मम्मी मेरीकॉम जब रिंग में उतरती हैं तो जैसी उसके शरीर में बिजली दौड़ने लगती है. जब तक प्रतिद्वंद्वी संभलता है वह जीत चुकी होती हैं. उससे पूरा देश कह रहा है, एक सोने का सवाल है. मगर मुङो लगता है सोना तो मेरीकॉम के लिए ही बना है.

Comments

Vivek Rastogi said…
शुभकामनाएँ हैं मेरीकॉम के लिये।