राइट टू रिजेक्ट़-बस प्यार से

बंदर : मुङो ये बता बाबू कहां ?
मदारी : सुशासन जी, छोटका मोदी जी, लालू जी, पासवान जी।
बंदर : मनमोहन जी, राहुल जी को लौडा, लफारी समझते हो। मदारी: लालू तो गये जेल
बंदर: बुद्घम् शरणम् गच्छामी।
मदारी : रहते बिहार में ख्वाब देखते दिल्ली का
बंदर: जब महाराष्ट्र मे छठ मना सकते तो दिल्ली में झंडा तो हमारा होगा।
मदारी : अरे चुनाव नही भक्तिमय माहौल है
बंदर : भक्तवत्सल श्री आसाराम
मदारी : चल बता यह माह कौन-सा है ? बंदर : दशहरा, बकरीद, दिपावली, छठ, वसूली
मदारी : वसूली का मतबल
बंदर : चन्दा दो नही तो धन्धा छोड़ो मदारी : शासन से डर
बंदर : फिर करप्शन कर
मदारी : पूजा-पाठ में करप्शन ना बाबा ना
बंदर : बिन करप्शन होत न पूजा़
मदारी : रावण वध की तैयारी होगी
बंदर : राम को थोड़ी उदासी होगी
मदारी : क्यू रे पेमेन्ट-वेमेन्ट का लफड़ा है
बंदर : नही जी़-ग़ठबंधन टूटने का झगड़ा है
मदारी : तुङो दशहरा में गठबंधन की है पड़ी
बंदर : बगले में बड़की भउजी खड़ी (राबड़ी देवी)
मदारी : पूजा समितियों ने की है जागरण की तैयारी
बंदर : क्यों नही घर से निकलेगी कन्याये बहुत सारी
मदरी : कन्या पूजन हमारी परम्परा है
बंदर : तो फिर बलात्कार सोसल राईट्स है
मदारी : चप्पे-चप्पे पर पुलिस खड़ी होगी
बंदर : अरे भाई तुम भूल गये, पुलिस खुद स्त्रीलिंग होती है़
( अच्छी लगे तो बजा दो ताली वरना दे दो, दो-चार गाली)
जयन्त कुमार सिन्हा
स्नातक (जनसंचार)
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय,भोपाल रहने वाला : दौलतगंज, छपरा अभी : भारतीय रेल की सेवा मे आर0डी0एस0ओ0, लखनऊ

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