कश्मीर का दिल चाहिए तो 370 को मत छेड़िए - महबूबा मुफ्ती


पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती काफी संवेदनशील राजनेता मानी जाती हैं और कश्मीर के लोगों के लिए हमेशा सक्रिय रहती हैं. युवाओं के बीच भी उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता है. वे कश्मीर में अमन-चैन का माहौल बनाने और अलगाववादियों को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने की पक्षधर रही हैं. हाल में जब नयी सरकार ने शपथग्रहण के मौके पर सार्क देशों के साथ-साथ पाकिस्तान के राष्ट्रपति नवाज शरीफ को भी आमंत्रित किया तो उन्होंने खुले दिल से इसका स्वागत किया. मगर जब नयी सरकार के एक मंत्री ने धारा 370 के खिलाफ बयान दिया तो उनका उखड़ जाना स्वभाविक था. नयी सरकार के इन दोनों कदमों के मसले पर मैंने उनसे टेलीफोन पर लंबी बातचीत की है, पेश है उस बातचीत का ब्योरा.
पिछले दिनों नयी सरकार के दो रुख सामने आये, पहला मोदी के शपथ ग्रहण के मौके पर पाकिस्तान के हुक्मरान समेत सार्क देशों के प्रतिनिधियों को भारत बुलाना, दूसरा सरकार के बनते ही एक राज्य मंत्री का धारा 370 के खिलाफ बयान देना. जहां पहले कदम पर कश्मीर के आवाम में उत्साह का माहौल नजर आया, वहीं दूसरे कदम से वहां से बड़ी तीखी प्रतिक्रियाएं आयीं. इन दोनों कदमों के आधार पर आप नयी सरकार का कैसा आकलन करती हैं?
370 के खिलाफ जो स्टेटमेंट है वह बिल्कुल कंडेम्नेबल है. एक तरफ दोस्ती और विश्वास बहाली की बात और दूसरी तरफ दिल तोड़ने वाली बातें. दोनों चीजें अजीबोगरीब लग रही हैं. आप लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते. क्योंकि बीजेपी समेत देश के सभी पढ़े-लिखे लोग जानते हैं कि धारा 370 को बदला नहीं जा सकता. इसे खत्म नहीं किया जा सकता. चुनाव तक तो ठीक था, चुनाव के बाद इस तरह के बयान बिल्कुल नहीं आने चाहिये थे. खुद पीएम को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिये और स्टेट मिनिस्टर को जिनके जरिये यह बात सामने आयी है, रोकना चाहिये. नहीं तो जम्मू-कश्मीर के लोग पहले से ही खौफजदा हैं, ऐसे में उनकी दिल में भरोसा और भी कम होगा.
नवाज शरीफ को भारत बुलाने के कदम को आप किस नजर से देखती हैं?
यह बढ़िया कदम था और मैंने इसकी तारीफ भी की है. जहां हमारे पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे मुल्कों से साथ बेहतर संबंध नहीं हैं, ऐसे में उन्हें शपथ ग्रहण के मौके पर बुला कर नयी सरकार ने अच्छा मैसेज दिया है. खास तौर पर अगर पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते होते हैं तो इसका पॉजिटिव असर कश्मीर के मसलों पर भी पड़ेगा. हालांकि अभी यह शुरुआत ही है, सरकार इस शुरुआत को कहां तक ले जाती है इसे देखना होगा. यह सिर्फ हेंडशेक तक सीमित न रह जाये. बातें आगे भी बढ़े. अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.
आपके हिसाब से इस मसले पर नयी सरकार को क्या कदम उठाने चाहिये?
कई चीजें करनी चाहिये. बातचीत के साथ रास्ते भी खुलें. आवाजाही हो, लोग एक दूसरे के साथ व्यापार कर सकें. रिश्तेदारियां कर सकें. संवाद हो. इसके अलावा कश्मीर के सेपरेटिस्ट के साथ बातचीत हो उन्हें डेमोक्रेटिक प्रोसेस में लाया जा सके. उनके साथ विश्वास बहाली हो. साथ में सियाचिन और सरक्रीक के मसले पर भी बातचीत हो और उसका समाधान निकाला जा सके.
ऐसा देखा गया है कि एनडीए की सरकारों के साथ आपकी पार्टी का तालमेल बेहतर रहा है.
नहीं मेरा यूपीए सरकार के साथ भी बेहतर तालमेल रहा है.
सामान्य राय यह है कि भाजपा पाकिस्तान विरोधी है, कश्मीर को लेकर उसका अलग ही रुख है. मगर जब भाजपा सरकार में आती है तो उसका अलग ही चेहरा सामने आता है.
इस नयी सरकार के बारे में तो मैं कुछ नहीं कह सकती, मगर वाजपेयी जी की सरकार को लेकर अनुभव अच्छे रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान से दोस्ती की हर संभव कोशिशें की थीं. यह पहली बार था कि एक प्रधानमंत्री बस पर बैठकर पाकिस्तान गया था. बाद में करगिल हो गया, मगर फिर भी उन्होंने जनरल मुशर्रफ को इंडिया बुलाया. कश्मीर में सीज फायर करवाया. वाजपेयी जी के इनिशियेटिव्स काफी अच्छे थे. मगर नयी सरकार के बारे में कुछ कह नहीं सकते. लोगों को पहले से शक था कि ये ऐसा करेंगे, अब इनके इस 370 वाले बयान ने कश्मीर के लोगों का दिल तोड़ दिया.
370 पर कई तरह की बातें होती हैं, कोई इसे खत्म करने की बात करता है तो कोई इसमें बदलाव की बात करता है. यह भी कहा जाता है कि कश्मीर की महिलाओं को यह बराबरी का हक नहीं देता..
370 खत्म करने की तो बात ही नहीं होनी चाहिये. अगर कश्मीर का दिल जीतना है तो यह सोचना होगा कि 370 को कैसे मजबूत किया जाये. पिछले दिनों गुपचुप तरीके से इसे कमजोर करने का ही काम किया गया है. उसे दुरुस्त करना जरूरी है. कश्मीर फिजिकली तो हिंदुस्तान के साथ है, अगर कश्मीरियों का दिल भी जीतना है तो 370 को मजबूत करना होगा, कमजोर नहीं. और जहां तक महिलाओं की बात है, यहां की महिलाएं मौजूदा प्रावधान से संतुष्ट हैं. इस मसले पर किसी बाहरी नेता को सलाह या सुझाव देने की जरूरत नहीं है.
उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि 370 खत्म हुआ तो कश्मीर भारत से अलग हो जायेगा..
उन्होंने क्या कहा यह मैं नहीं जानती. मगर मेरे हिसाब से 370 ही वह पुल है जो कश्मीर को हिंदुस्तान से जोड़ता है. महाराजा हरि सिंह ने जो विलय किया था उसमें 370 ही बड़ा आधार बना था. अगर इस पुल को आप तोड़ने या कमजोर करने की कोशिश करेंगे तो जाहिर है कश्मीर आपकी पहुंच से दूर जायेगा. और इसके जिम्मेदार वे लोग होंगे, जो 370 को कमजोर करने या खत्म करने की कोशिश करेंगे.
(प्रभात खबर पॉलिटिक्स के ताजा अंक में प्रकाशित)

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