क्या आपके साथ भी ऐसा होता है...


पिछले दिनों अपना एक रेयर सा अनुभव मैंने फेसबुक पर शेयर किया था. मुझे लगता था कि ऐसा सिर्फ मेरे साथ ही होता है. मगर फेसबुक पर लोगों ने जिस तरह इस अनुभव को लेकर टिप्पणियां की उससे लगा कि कई लोग ऐसा ही फील कर रहे हैं. मेरे लिए उनकी टिप्पणियां चकित कर देने वाली थी. इसलिए उन्हें कंपाइल कर पोस्ट का रूप दे दिया है.
मेरी उम्र 39 साल हो चुकी है, मगर मैं जब किसी 25-30 साल के व्यक्ति से मिलता हूं तो उससे पहली दफा ऐसे व्यवहार करता हूं, जैसे मैं अपने चाचा लोगों से किया करता हूं. 30-32 साल की कोई महिला दिखती है तो पहले झटके में वह मुझे मेरी बुआ या मौसी जैसी लगती है. 60 साल के किसी भी व्यक्ति में मैं अपने नाना की छवि देखता हूं, जबकि मेरे पापा की उम्र 60 से अधिक हो चुकी है. 65 साल की महिला में अपनी दादी की, जबकि अब मेरी मां भी 60 साल की उम्र तक पहुंचने जा रही है. मैं अपनी उम्र के किसी व्यक्ति से टकराता हूं तो पहले झटके में महसूस करता हूं कि वह मुझसे काफी बड़ा है.
ऐसा क्यों होता है? मेरे ये परसेप्शन उस वक्त के होंगे जब में 18-20 साल का रहा होउंगा. क्या उस उम्र के बाद मैं ठहर गया? मैं हमेशा खुद को उसी उम्र में क्यों महसूस करता हूं? मैं उसी वक्त में क्यों ठहरा हुआ हूं? कहीं यह आपके साथ भी तो नहीं होता... मुझे लगता है अधिकांश लोगों के साथ ऐसा होता होगा... मैं श्योर होना चाहता हूं. मैं इस फेनोमेना को समझना चाहता हूं. मुझे लगता है मनोविज्ञान का विशेष रूप से अध्ययन करने वाले साथी जरूर इस मसले को समझा पायेंगे, ऐसी उम्मीद है...
Anshu Mali Rastogi भाई जान अब क्या कहें। कुछ दिन पहले यह लिखा था सो पढ़ लें। http://chikotii.blogspot.in/2014/09/blog-post_25.html
Nishant Mishra मैं 40 का होने वाला हूं. मेरे साथ भी ऐसा ही होता है. मुझे लगता है मैं (मानसिक तौर पर) 25 पर अटका हूं.... चेहरे-मोहरे से भी 32-33 का ही लगता हूं. मुझसे 3-4 साल बड़े लोग अंकल जैसे लगते हैं मुझे. 1990 के आसपास के दौर के बारे में सोचते रहना मेरा पसंदीदा शगल है.
Anshu Mali Rastogi मैं भी Nishant Mishra G के साथ हूं।
Kumar Pratyush thoda bahut samay bhabhi ke saath gujara kare to aapni jagah pe aa jayenge
Rajesh Mishra ekdum hamare saath bhi yahi feeling hai .... Logon ko apne age se relate karne main mushkil ho rahi hai ...
Sujata Sharma Mujhe bhi bahut vakt lag raha hai. 20s-30s ka daur kuchh aapki batayee hui tarz par guzra.Us umr se abhi tak ye Aunty urf ANTI sambodhan behad behooda aur naagavaar lagta tha aur lagta hai,halaanki paidaishi umr se badi dikhti hun. Jis umr me pehla pyaar hua hota hai, kai log umr ko vahan rok lete hain,mera vyaktigat anubhav.
Sharad Shrivastav जब सपना देखते हैं तो उसमे अपने आपको किस उम्र का पाते हैं? उससे भी आप जान सकते हैं की मानसिक अवस्था मे आप किस उम्र मे अटके हैं।
Neelmadhav Chaudhary हाँ भाई मुझे भी ऐसा लगता है | समय के साथ उम्र तो बढ़ जाती है , पर मानसिकता शीघ्र स्वीकार नही कर पाता है | कभी कभी अपने जूनियर को भी भाइजी या भाइसाहेब कह जाता हूँ , और आजकल कोई बड़ा (यहाँ मेरा सिर्फ़ उम्र से वास्ता है) बनना नही चाहता स्वतः उसके चेहरे पे परेशानी के भाव उभर जाते है और इस बात के लिए साँरी बोलूँ ये भी कहाँ सहन होगा ना इधर ना उधर| बस मुस्कुराकर रह जाता हूँ|
Ajit Singh Mere saath bhi aisa he hota hai.
Tarun Rawal man to bachcha ha ji....
Pushya Mitra जी सर...
Ravi Singh Achha hai......
Suraj P. Singh · I wonder! Exactly the same thing happening to me.. I have never told this to anyone fearing to be declared as a sick man. I feel exactly the way you do.. and some times it seems quite awkward for me and for others.
Pushya Mitra मैंने इसी वजह से लिखा था कि लोग समझ पायें कि हम इन हालात में अकेले नहीं है.
Ravi Singh Waise mujhe toh aisa feel karna hi padta hai...... in the age of 37+ ....still i am unmarried
Devendra Yadav मानव जीवन का ये भ्रमपूर्ण सत्य है कि उसके युवावस्था के बिताये सुखद पल उसके शेष जीवन पर हावी होने की कोशिश करते हैं।
Sanjay Kumar Sah tum jo samjhe ho .. vahi sahi hai bhai.
Harendra Narayan Nostalgia है ये
Pushya Mitra आप अपना अनुभव बताइये Harendra Narayan जी
Harendra Narayan मैँने तो समय के अनुसार ढाल लिया खुद को।
Dharmesh Kumar जो मैं मन में अपने लिए सोचता हूँ उसे तुम कैसे समझ लेते हो?
Neema Singh Achchha hai main aap se bahut dino se mili nahi. Aap kya mujhe chachi bulane wale hain? Neema Singh Ye baat mere husband k saath hai.
Ravi Singh Haa haaa
सतवीर सिंह 47 का हूँ , अभी भी बरसो पुराने समय में जीता हूँ ! लगभग 25 -27 की उम्र में ! जींस टी शर्ट स्थायी ड्रेस है ! अब भी लगता मानो पहले के माफिक तूफानी गेंदबाजी कर सकता हूँ , रफ़्तार से कोई भी वाहन चला सकता हूँ ! जिम में उतना ही वजन उठा सकता हूँ ! कोई अंकल कहता तो पलट कर देखता हूँ कि किसे कहा गया?
Shruti Thakur I totally get u
Uday Mishra mai khud ko boodha mehsoos nahi karta. jab aaina dekhta hoon tab lagta hai ki kitns badal gaya hai chehra Saurabh Chaubey Asal me ye 20-30 ka daur jyadatar log ya kahoon to 90+% log apne career apne aim ko paane ki jaddojahad me par kar jate hain...aise me unhe pta hi nhi hota ki 10 saal beete kaise...!! Kuch 10% hi aise log hote honge jo 20-30 masti me gujarte hain..! So lastly kahani film a Wednesday type ho jati hsi..10saal kaise gujre pta hi nhi hota..!
Shashank Raj bhaiya, mere sath bhi aisa hi hota hai. aur sabse badi muskil navoday vidyalay me shikshako ke abhiwadan me aati hai jab ye pata nahi chalata hai ki mujhase bade hai ya barabari ke ya chote.
N Singh Raj Same N Singh Raj Aisa hi hota
सतवीर सिंह आपकी इस पोस्ट से एक सवाल और जेहन में आ रहा है ! क्या हमें तब भी ग़लतफ़हमी नहीं होती जब कोई लड़की अपने बाल सुलभ तरीके से अंकल समझ कर मुस्कुराती और हम समझ बैठते कि हम अभी भी रेस में है ???
DrBijay Shankar Jha ·Sharir ki umra badhti chali jati hai lekin man apni hi Masti me bhraman karti rahti hai.ye prakriti ki apni
Santosh Singh अंतर्मन में हमारी उम्र युनिवर्सिटी के लास्ट इयर के क्लास-रूम या हॉस्टल के कमरे में ठहर जाती है ...
सतवीर सिंह पुरानी फिल्म शौकीन इस विषय पर बेहतरीन हास्य बनाती थी !
सीमा संगसार ऐसा अमूमन सबके साथ होता है जैसे शास्वत सत्य मृत्यु को लोग स्वीकार नहीँ कर पाते कभी भी वैसे ही हर इंसान का अंतर्मन बुढ़ापे की ओर जाते देखना पसंद नहीँ करता .
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Girlsguideto Survival Don't worry अपुन भी 10 साल पीच्चे चल रहे हैं बिरादार... अपुन को चिर बाला रोग हो गया है हम जवान दुनिया बूढ़ा गयी है...
Pashupati Sharma ये आपके मन मेें बैठे गहरे विश्वास हैं... या यूं कहें बुआ के बीच इतने घिरे रहे हैं कि हर महिला (30-32 की क्योंकि बचपन में बुआएं इसी उम्र सीमा में रहीं होगी) पहली नजर में बुआ नजर आती हैं... दादा-दादी और नाना-नानी के साथ भी कुछ ऐसा ही लगाव रहा होगा... और अपने बराबर के लोगों को भी ज्यादा सम्मान देने की वजह से उनकी उम्र में इजाफा कर देना भी स्वाभाविक है... मेरे साथ शायद ऐसा नहीं होता... क्या होता है वो कभी और इत्मीनान से
Siddharth Srivastava Pushya Mitra ye aur kuchh nahi us comfort zone ki talash hai jisse hume ek taraf aazadi bhi di thi aur achchhi-bure faisalo ki responsibility bade logo ki thi. Risk minimum aur mauz personal. Aisa zone life me nahi laut pata hai aur hum use har make par jeena chahte hain. Ek baar sochna ki ab jab pichhli generations ke logo ki maut ki khabar milti hai to jyada asar hota hai muqable 20 baras ki umra ke... Siddharth Srivastava Pashupati bhai ka case bhi isi ka extention hai....wo hum sab me kahin jyada independent the...ye Unki personality thi.. Isliye unke liye umra ke failed, uske jokhim, uska nafa nuksan sab unka khud ka tha.. It seems zone was not that comfortable and sedative as ours. Siddharth Srivastava Failed ko faisle padded..
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Pawan Singh बूढ़ापे का आना और जवानी का न जाना। वैसे यह अक्षय जवानी का लक्षण है और शुभ भी है।
Manish Manohar Meri samajh mein yeh sabake sath hota hai bas degree ka antar hota hai. Hum apani gujarti umra ke mutabik khud ko taiyar nahi kar paate hain ya kah lo us umra ki pace ke sath sahi talmel nahi baitha paate hain sath hi hum hum umra ke us dorahe par hain jahan aage ki taraf budhapa aur pichhe chhut chuka jawani hota hai to jahir hai hum khud ko bhudon ki category mein nahin rakh jawano ki categori mein rakhate hain aur yahi sab garbari failata hai.
Vinay Verma जय हो मिल्खा सिंह जी की
Sujeet Kumar Singh · काफी अच्छा बिन्दु उठाया है आपने, जो शायद सभी अनुभव करते हैं, परंतु इसे छूते नहीं हैं। इंसान जिस उम्र को काफी शिद्दत से जीता है, उसके अनुभव उसके जीवन में काफी गहरा असर छोड़ जाते हैं और उन अनुभवों से आगे भी उसका अन्तर्मन रिश्ता बनाए रखना चाहता है। शायद इसीलिए आपको ऐसा अनुभव हो रहा है या होता है। इधर भी ऐसा होता है ।
Harendra Narayan आदमी दोहरी मानसिकता मेँ जीता है इसलिये ये भ्रम होता है। Puberty के बाद जब आप Youth बनते हैँ तो सब पीछे छूट जाता है।. . . .कोई लौटा दे मेरे बीते हुये दिन !
सम्पा देव बरुआ मैं भी

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